लालची पंडित
(क्या अप्प लोग को पता हैं अज्ज से बहोत साल पहले पंडित को भगवान की तरह माना जाता था। इसीलिए वो कही भी पूजा करने जाते तो पूजा करने के बाद कुछ भी मांगते लेते थो और जो पूजा करवाते थे उनको वो देना पड़ता था। ) और मैं अज्ज उस ज़माने के एक पंडित की कहानी अप्प लोगो को बताने जा रह हु उस समय एक पंडित था उसका नाम समीर था और वो बहोत लालची था वो कही भी पूजा करने जाता तो कुछ भी मांग लेता था। वो कभी 1 बोरी चावल मांग लेता कभी सोना मांग लेता कभी चांदी मांग लेता इसीतरह उसका जीवन चल रह था
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English text
(kya app log ko pata hain ajj se bohot sal pahele pandit ko bhagwan ki tarah mana jata tha isliye wo kahi puja karne jate to puja karne ke bat kuch bhi mang lete the or jo puja karwate the unko wo dena bhi partha tha ) or main ajj us zamane ke ak pandit ki kahani app logo ko batane ja raha hu . us samay ak pandit tha or uska naam samir tha or wo bohot lalchi tha wo kahi bhi puja karne jata to kuch bhi mang leta wo kabhi 1 bori chawal(rice) mang leta kabhi sone(gold) ka coin mang leta kabhi chandi (silver)mang leta isitrah uska jiwan chal rah tha
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तो एक दिन वो सुबह सुबह एक घर मैं गया और पूजा करने के बाद उसने देखा की घर में बहोत अच्छा सुगंद आ रहा हैं उसने पूछा क्या बन रहा हैं घर में तो घर के आदमी ने कहा खीर बन रहा हैं तो पंडित ने कहा मुझे भी क्या एक कटोरी खीर मिलेगा तो उस आदमी ने कहा ज़रूर और पंडित को एक कटोरी खीर दे दिया और पंडित वाहा से दूसरे घर पूजा करने चला गया और वह से पूजा करने के बाद एक बहोत बारे लौकी ले लिया
और वह से पूजा करने बाद दूसरे घर गया और उस घर में गुस्ते ही उसने देखा उस घर में बहोत ताज़ा तरभुज रखा हुआ हैं
तो उसने जल्दी से पूजा समपम किया और उस घर वालो से कहा ज़ज़मान मुझे क्या एक तरभुज मिल सकता हैं तो उनलोगो ने कहा है ले लीजिये लेकिन एक समस्या हो गया किउ के उसके एक हात में खीर और एक हात मैं लोकि था तो अब वो तरबूज को कैसे लेता तो उसने तरबूज मैं जो ऊपर की तरफ जो निकला होता हैं उसको अपने छोटी से बांध दिया और घर की तरफ जाने लगा तो घर जाते जाते उसको बहोत जोर से प्यास लगी तो कुछ दूर चलते ही उसे एक कुआ मिला
तो उसने खीर को निचे रखा और लोकि को भी निचे रखा और कुए के पास चला गया और अंदर बाल्टी गिरिया और ऊपर घिचने लगा और बाल्टी ऊपर आते ही वो बाल्टी को अपने पास लेन के लिए निचे झुखा
तो उसने जो तरभुज अपने छोटी में बंधा था वो लुढ़क कर निचे की तरफ आ गाया और वो पंडित निचे गिर गया
तो बच्चो अज्ज हमने क्या सीखा
अज्ज हमने यही सीखा की लालच बहोत बुरी बाला होती हैं कभी भी लालच नहीं करना चाहिए
और वह से पूजा करने बाद दूसरे घर गया और उस घर में गुस्ते ही उसने देखा उस घर में बहोत ताज़ा तरभुज रखा हुआ हैं
तो उसने जल्दी से पूजा समपम किया और उस घर वालो से कहा ज़ज़मान मुझे क्या एक तरभुज मिल सकता हैं तो उनलोगो ने कहा है ले लीजिये लेकिन एक समस्या हो गया किउ के उसके एक हात में खीर और एक हात मैं लोकि था तो अब वो तरबूज को कैसे लेता तो उसने तरबूज मैं जो ऊपर की तरफ जो निकला होता हैं उसको अपने छोटी से बांध दिया और घर की तरफ जाने लगा तो घर जाते जाते उसको बहोत जोर से प्यास लगी तो कुछ दूर चलते ही उसे एक कुआ मिला
तो उसने खीर को निचे रखा और लोकि को भी निचे रखा और कुए के पास चला गया और अंदर बाल्टी गिरिया और ऊपर घिचने लगा और बाल्टी ऊपर आते ही वो बाल्टी को अपने पास लेन के लिए निचे झुखा
तो उसने जो तरभुज अपने छोटी में बंधा था वो लुढ़क कर निचे की तरफ आ गाया और वो पंडित निचे गिर गया
तो बच्चो अज्ज हमने क्या सीखा
अज्ज हमने यही सीखा की लालच बहोत बुरी बाला होती हैं कभी भी लालच नहीं करना चाहिए






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